
यह कहानी अभी लिखी जा रही है, और इसका हर नया दिन एक बेहतरीन चैप्टर है।बनारस की सुबह, हाथ में चाय का कुल्हड़ और आंखों में एक साथ कई ख्वाब—शायद यही कहानी की सबसे खूबसूरत शुरुआत है।
अमर उजाला की खबरों की दुनिया में कलम चलाने वाली शुभांगी जब शाम को घर लौटती है, तो पत्रकारिता का वो संजीदा चश्मा उतर जाता है। फिर शुरू होती है उस कलाकार की कहानी, जो कभी कागज़ पर 'अनकही' कविताएं उकेरती है, तो कभी अपनी आवाज़ से सुर सजाती है।
घर का माहौल हमेशा से उसकी ताकत रहा है। पापा की वो गहरी बातें, जिन्होंने उसे समाज को एक अलग नज़रिए से देखना सिखाया, और दूसरी तरफ वो 12 साल का छोटा भाई, जिसकी शैतानियों और हँसी में उसकी थकान मिनटों में गायब हो जाती है।
डिजिटल दुनिया में @ShubhangiAnand071 के नाम से अपनी कला को बिखेरने वाली यह लड़की, बनारस के घाटों की तरह ही शांत भी है और अपने इरादों में गंगा की धारा जैसी मज़बूत भी। वह जानती है कि रास्ता लंबा है और मंज़िल बड़ी, लेकिन अपनी कलम, कला और मेहनत के दम पर वो अपनी तकदीर का पन्ना खुद लिख रही है।
आशा करती है कि उसकी ये अनचाहे सफ़र की कहानी आपको अपने दिल के करीब महसूस होगी और इसे आप अपनी भी जिंदगी की कहानी से जोड़ पाएंगे!
अगर आपको हमारी कहानी में दिलचस्पी है तो कृपया हमें बताएं ताकि हम आगे अपनी कहानी को आप तक पहुंचाए!