दिनांक:01/04/2026
"पंछियो का दर्द"
हम है आसमान में उड़ते
स्वयं ही अपना दाना चुकते
हाय रे गर्मी
सर्दी से हमें नही है दिक्कत
गर्मी मे है पानी की किल्लत
हाय रे गर्मी
हम है पंछी इंसान से कुछ नही चाहते
अपनी मर्जी से स्वयं ही दाना चुगते
बस गर्मी मे आपसे यही आस है
हमारी भी बुझती नही प्यास है
आयी रे गर्मी
बचालो पानी पीला कर हमारे प्राण है
हमारे बच्चो मे बसी हमारी जान है
दुआ देगे आप लोगो को दिल से
हर गर्मी मे पानी पिलाओ हमे दिल से
हम है पक्षी हमारी भी आप लोगो से आस है
हमें भी लगती प्यास है
आयी रे गर्मी
विपिन उपाध्याय
भवानीमंडी
राजस्थान