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चुना हुआ व्यक्ति एपि 1

हेलो दोस्तो, मेरा नाम दीपक गंगारेकर है. मेरे पिता का- नाम गजानंद गंगारेकर और माता का नाम चुनी बाई गंगारेकर है. मैं, मध्य प्रदेश के खरगोन जिले की कसरावद तहसील के, ग्राम पंचायत सामेडा का रहने वाला हूं. और मैं, अपनी कहानी के माध्यम से, आपको एक ऐसे व्यक्ति की" कहानी सुनाने जा रहा हूं. जिसे ईश्वर द्वारा चुनकर धरती पर, ऐसे लोगों के जीवन में, प्रकाश फेलाने के लिए, भेजा गया है. जो जीवन के संघर्षों से थक चुके हैं, हार चुके हैं, निराश हतास हो चुके हैं. ऐसे लोगों के जीवन में एक रोशनी की किरण जगाने, अपने सपनों को पूरा करने के लिए. उन्हें एक बार और कोशिश करने की प्रेरणा देने के लिए, धरती पर भेजा गया है. कि व्यक्ती के" जीवन में चाहे कितनी ही मुश्किलें आ जाएं. चाहें कितनी ही परेशानी तकलीफें आ जाय. अगर एक रास्ता बंद हो गया है. तो भगवान से प्रार्थना कीजिए. भगवान आपके लिए नया मार्ग तैयार कर देंगे. जिस पर चलकर आप अपने सपनों को पूरा कर सकतें हैं. लेकिन अपने सपनों से give up नहीं करना है. भगवान का नाम लेकर अपने" सपनों को पूरा करने के लिए एक बार और" कोशिश करने की प्रेरणा देने के लिए धरती: पर भेजा गया है. तो चलिए फिर सुनते हैं. एक ऐसे ही" ईश्वर के चुने हुए व्यक्ति की कहानी, जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए, किसी भी तरह की चुनोतियों, परिस्थितियों से हालातों से समझोता नहीं करता है. हार नहीं मानता है. अगर एक रास्ता बंद हो जाये. तो वह भगवान से प्रार्थना करता है. कि भगवान मेरे लिए कोई दूसरा मार्ग बताइए जिस पर चलकर में अपने सपनों को पूरा कर सकुं. ओर वह दुसरों को भी यही" प्रेरणा देने के लिए आया हैं. कि आप ईमानदार रहकर भगवान पर भरोसा करके मेहनत करते रहीए. अगर एक रास्ता बंद हो गया है. तो भगवान आपके लिए दुसरा रास्ता तैयार कर देंगे. चुना हुआ व्यक्ति यानी कि में, दीपक गंगारेकर, मेरा जन्म एक गरीब, मेहनती और ईमानदार व्यक्ति के, घर दो जनवरी उन्नीस सौ नब्बे, को हुआ. ईश्वर का चुना हुआ व्यक्ति हैं. तो फिर उस व्यक्ति में, ईश्वर के समान ही गुण भी होंगे. जैसे कि, दया, करुणा, ममता, प्रेम, स्नेह, क्षमा आदी. वह ईश्वर के समान ही सीधा, भोला, मासुम होगा. ईश्वर का चुना हुआ है, तो फिर उसके पास Devine की powers भी होगी: और अगर" ईश्वर का चुना हुआ है, तो फिर किसी की औकात भी नहीं है! कि उसे किसी" प्रतियोगिता या प्रतिस्पर्धा में या किसी भी तरह की कोई रणनीति में हरा दे" ईश्वर का चुना हुआ व्यक्ति हैं, तो फिर व्यक्ति हर समय" ईश्वर की देख रेख और निगरानी में ही रहेगा. उसके साथ हमेशा" एंजल का पहरा रहेगा. ताकि वह किसी भी तरह की" नकारात्मकता: से प्रभावित होकर गलत मार्ग पर ना चला जाए. मेरे पिता के पांच भाई, और दो बहनें थीं. मेरे पिता सभी भाईयों, में सबसे बडे थे? और पिता से बडी एक बहन थी. बहन की तो शादी हो गई थी. बहन तो अपने ससुराल चली गई थी. पिता सभी भाईयों में बडे थे. तो घर की" जिम्मेदारी भी पिता के ऊपर ही आ गई थी. तो पढाई- लिखाई करने पर ज्यादा ध्यान दिया नहीं. और घर की" जिम्मेदारी उठाते रहे. फिर पंद्रह साल की उम्र, में पिता का" विवाह कर दिया गया. उस समय कम उम्र में ही बच्चों की" शादी कर दी जाती थी. और लडकी को कम उम्र में ही" ससुराल भेज दिया जाता था. मेरे नाना ने मेरी" मां से घर का कभी कोई काम नहीं करवाया था. क्योंकि घर में काम करने के लिए मेरी नानी और मामीयां थी. तो वै घर का काम कर लिया करती थी. और उस समय मां की उम्र भी तेरह साल ही थी. और घर में सबकी लाडली भी थी. लेकिन कम उम्र में, शादी हो गई तो. अब ससुराल में तो काम करना ही पडेगा. पर मां ने कभी घर का काम तो किया नहीं था. और उनका ब्याह भी ऐसे घर में कर दिया गया था. जहां खाने के लिए खाना और पहनने के लिए कपडे तक नहीं थें. और मां सभी भाईयों में बडी भी थी. क्योंकि बाकी सब तो छोटे- छोटे थे. और घर का काम किसी को भी करना नहीं आता था. और ऊपर से मां को भी घर का काम करना आता नहीं था. तो फिर ऐसे में सारा काम दादी के हिस्से ही आयें. तो दादी तो मां को खुब डांट फटकार लगाती थी. मां से जब घर का काम नहीं होता था. तो पापा मम्मी का सपोर्ट कर दिया करते थे. ताकि मां और दादी की लडाई झगडे कम हो. फिर मां को धिरे धिरे ससुराल की आदत होती चली गई. और वह भी दादी के साथ घर का काम सिखते चली गई, पापा से जो छोटा भाई था. वह स्कुल जाया करता था. और दुसरे छोटे भाई दादी और मम्मी पापा के साथ काम करने जाया करते थे. फिर धिरे- धिरे सब बडे होते गये. दो भाई पढाई- लिखाई कर रहे थे. फिर दादी और माता- पिता ने गांव में रहने वाले तीन भाईयों और एक बहन की शादी करवां दी. अब गांव में रहने वाले चारों भाईयों की शादी हो गई थी. और दो भाई पढाई- लिखाई करने छात्रावास में रहने चले गए. जब गांव में रहने वाले चारों भाईयों की शादी हो गई थी तो जो पिता से छोटे तीन भाई थे. उनके ससुराल वालों की आर्थिक स्थिति कमजोर थी. लेकिन मेरे पिता के ससुराल वालों की आर्थिक स्थिति मजबूत थी. तो मेरे नाना- नानी खाने पीने का सामान बच्चों के कपडे आदि. मां के हाथों भीजवा दिया करते थे. पर मेरी चाचीयों के माता- पिता कमजोर थे. इसलिए उन्हें हर चीज खरीद कर खाना पडता था. या पहनना पडता था. तो जब मेरे माता- पिता और मेरे भाई- बहन अच्छे कपडे पहने अच्छा खाना खाएं तो मां, दादी और चाचाओं को भी दे दिया करतीं थीं. तो दादी और चाचा मां का पक्ष लिया करते थे. घर का सारा काम घर के शादी ब्याह सभी फेसले मां ही लिया करती थी. तो चाचा अपनी पत्नियों को भला- बुरा बोलते थे. दादी भी बोलती थी. की तुम्हारे माता- पिता तुम्हारे पति और बच्चों के लिए कुछ नहीं पहुंचाते हैं. तुम भी अपने माता- पिता को कहो कि हमारे पतियों और बच्चों के लिए हमें खाली हाथ ससुराल मत भेजा करों. तो अब चाचीयों के माता- पिता की स्थति कमजोर होने के कारण अपनी सांस और पतियों के सामने नीचा देखना पडता था. और हर बार की बैइज्जती ने चाचीयों के मन में मां के प्रति, हीन भावना उत्पन्न कर दी. और मां, गांव की तीनों चाचीयों की आंखों में खटकने लगी थी. कि मां को उनके भाई अच्छा खाना पानी कपडे लत्ते भीजवातें हैं. तो यह सबको बांट कर सबकी नजरों में इज्जत कदर बना रही है. और इसकी वजह से हम अपनी सांस और पतियों की नजरों में छोटे साबित हो जाती है. इसकी वजह से हमें अपने पतियों और सांस की गालियां खाने को सुनने को मिलती है. और हमारे पति और सांस सभी लोग इसकी ही बातें सुनते हैं. अब हमें इसे हमारे पतियों और सांस की नजरों से उतारना पडेगा. लोगों में बनाईं हुई, इसकी इज्जत, कदर, मान- सम्मान को घटाना पडेगा. तो अब तीनों चाचीयों ने मिलकर तांत्रिको को पकडा और तांत्रिको से टोटके करवाकर ले आई, और अपने पतियों को और दादी को खाने में मिलाकर खिला दिया. और अपने वश में कर लिया. ताकि फिर सब उनकी बातों पर भरोसा करें. और उनकी बातें सुने. जब अपने पतियों और दादी पर टोटका किया. तो उनके पति और दादी चाचीयों के वश में हो गई, तो अब मां अगर नान- नानी के घर से कोई भी खाने पीने का सामान लेकर जाये? और चाचाओ ओर दादी को देकर आये, तो चाचीयां अपने पतियों और दादी को यह कहकर खाना फिंकवा दे की मेरी मां अपने भाईयों के घर से जो सामान लेकर आती है. उस सामान में टोटका करवा कर लाती है. और फिर हम सबके घर देने आती है. ताकि घर के सभी लोग उसके वश में रहें. तो अब से वह अपने भाईयों के घर से कोई भी सामान लेकर आये, तो खाना मत वरना. तुम सबको कुछ हो जायेगा. टोटके चाचीयां करती थी. लेकिन बदनाम मेरी मां को करती थी. मेरी मां घर की बडी बहु थी. और अपने घर से सबके लिए कुछ न कुछ लेकर आती थी. मां यह सोचती थी कि मेरे पिता तो, मूझे और मेरे पति बच्चों को देते ही हैं. मुझे तो और दे देंगे. पर मेरी देवरानियों के माता- पिता गरीब कमजोर है. तो क्युं ना में इन्हें भी बांट दुं. मां की इस तरह की सोच को देखकर घर के सभी लोग मां को ही घर के सारे फेसले लेने देते थे. लेकिन तीनों चाचीयों के घर से कुछ नहीं आता था. तो फिर घर में तीनों चाचीयों की, कोई खास इज्जत- कदर करता नहीं था. पर यह तीनों भी चाहती थी. कि घर में जैसी इज्जत- कदर, मान- सम्मान मेरी मां का है. वह सम्मान मां से छीनकर इन्हे दे दिया जाय. अब ऐसे तो इन्हें वह सम्मान मिल नहीं सकता था. तो फिर इन तीनों ने तांत्रिक क्रियाओं का सहारा लिया. घर में सबके ऊपर अपनी धाक जमाने के लिए. सबकों अपने कंट्रोल में रखने के लिए. गांव में भी मेरे माता- पिता की इज्जत- कदर मान- सम्मान थी. किसान माता- पिता की ईमानदारी की वजह से उन्हें काम भी बहुत दिया करते थे. तो चाचीयां किसानों की पत्नीयों के कान भर आती थी. कि हमारी जेठानी ने तो तुम्हारे पतियों पर कोई जादू टोना कर दिया है. तभी तो तुम्हारे पति सिर्फ मेरी जेठानी को ही काम का बोलने जाते हैं. तो तुम अब थोडी समझदारी रखों. अब जो किसान माता- पिता की ईमानदारी को जानते थे. वैे किसान और उनकी पत्नियां चाचीयों की बातों को नजरंदाज कर दिया करतीं थीं. और जो महिलाएं नयी नयी शादी करके गांव में आयी होती थी. वह महिलाएं चाचीयों के बिछाए जाल में फस जाती थी. अब माता- पिता के ऐसे ही दिन cut रहे थे. कि फिर जो दो चाचा छात्रावास में पढाई कर रहे थे. उसमें से एक बडे भाई की सरकारी नौकरी लग गई. माता- पिता जिस भी किसान के घर काम करने जाएं. और अगर वह किसान! माता- पिता की ईमानदारी को देखकर उन्हें मुफ्त में, कुछ दे दे. तो चाचीयां उस किसान की पत्नी के कान भर आती थी. कि मेरी जेठानी ने तो तुम्हारे पति पर कुछ कर दिया है. खेत में जाकर देखो? नहीं तो मेरी जेठानी तुम्हारी पुरी फसल को अपने घर ले आयेगीं. अब जो महिलाएं माता- पिता की ईमानदारी को जानती थी. वै चाचियों की बातों को नजरंदाज कर देती थी. और जो महिलाएं ससुराल में नयी थीं. वै चाचीयों की बातों पर विश्वास करके खेत में पहुंचकर माता- पिता से हिस्सा लेती थी. जिससे फिर माता- पिता को नुकसान झेलना पडता था. पर माता- पिता ने अपनी ईमानदारी नहीं छोडी. मेरी चाचीयों ने उनके मार्ग में कई रुकावटें डाली. कभी चाचीयों ने माता- पिता की लोगों में, बदनामी कराएं तो कभी उनकी अफवाह उडाए. तो कभी उनके कोई काम बनने से रोक देती थी. बस ऐसी जिंदगी माता- पिता की चल रही थी. ईमानदार थे. सच्चाई की राह पर चल रहे थे. लेकिन डर और भ्रम के चलते अपने जीवन में कुछ बडा हासिल कर नहीं पाये. क्योंकि मेरी चाचीयों ने भ्रम इतना फेला रखा था! कि गांव के सारे लोग उन्हीं की भाषा बोलते थे. जिसके कारण माता- पिता को भी सही से सलाह देने वाले कोई थे नहीं. और माता- पिता गांव से बाहर कभी गये भी नहीं. नये लोगों से कभी मिले ही नहीं. जो उन्हें दुनिया के बारे में बता सकें. कि आपके गांव के अलावा भी दुनिया में दुसरे देश है. जो बहुत खूबसूरत है, सुंदर है, जहां आप चाहें तो जा सकतें हो. और आप भी अपनी जिन्दगी को खुबसूरत बना सकते हैं. चाचीयों ने पुरे गांव वालों को अपने भ्रम के जाल में फंसा लिया था. गांव वालों के मन में इतना डर और शक भर दिया था. कि गांव वाले दुसरे शहर जाने के नाम से भी डरते थे. देश बदलना तो बहुत दुर की बात है. अगर कोई व्यक्ति किसी योजना पर भी काम करना चाहे तो उस योजना के नाम पर भी लोगों के दिमाग में शक और डर भर देती थी. अब ऐसे ही माहोल में मेरे माता- पिता भी रहते थे. तो माता- पिता भी अपने लिए बेहतर सोच नहीं पा रहे थे. और अगर किसी योजना के बारे में सोचते भी तो उस योजना पर काम करने के पहले सलाह मशविरा करने मेरे जो दो चाचा टीचर हैं उनके पास पहुंच जाते थे. और जब उन दोनों भाईयों को पता चलता था. कि भईयां भाभी इस योजना पर काम करेंगे. तो उनके भीतर एक डर बैठ जाता था. कि अगर भईयां- भाभी इस योजना पर काम करेंगे. तो यह हमसे आगे बढ जायेंगे. तो वै दोनों भाई माता- पिता को योजना की गलत जानकारी देकर माता- पिता से योजना को बंद करवा देते थे. और कहते थे कि इन सबको छोडो और मजदुरी करते रहो. इस योजना पर काम करोगे तो तुम्हारा बहुत पैसा खर्च हो जाएगा. तुम लोगों का इस तरह की चालाकी, राजनीति दिखाकर माता- पिता से योजना बंद करवा देते थे. और अगर माता- पिता दोनों चाचाओं से सलाह मशविरा नहीं ले. तो फिर गांव वालों से सलाह मशविरा लेते थे. और चाचीयों ने तो गांव वालों की सोच को भी परिवर्तित किया हुआ था. अगर गांव वालों को माता- पिता किसी योजना के बारे में बताते तो गांव वाले चाचा- चाची को बता दिया करते थे. कि तुम्हारे भईया- भाभी इस योजना पर काम करने वाले हैं. तो चाचा- चाची गांव वालों को कहकर माता- पिता के मन में डर और भ्रम उत्पन्न करवा देते थे. अब भगवान माता- पिता की ईमानदारी को भी देख रहे थे. और चाचीयों की चालाकियों को भी देख रहे थे. कि मेरे भक्तों को परेशान किया जा रहा है. और अगर मैं भी ऐसे चुप बैठा रहा तो मेरे भक्त का मुझ पर से विश्वास खतम हो जायेगा. फिर सच्चाई पर से भगवान पर से मेरे भक्त का और लोगों का भी भरोसा उठ जाएगा. तो भगवान ने मेरे माता- पिता के जीवन में मेरे भाई- बहनों का जन्म करवाया. ताकि बच्चों के सहयोग से माता- पिता की आमदनी बढेगी. आर्थिक स्थिती बेहतर हो जायेगी. और भाई- बहन नयी सोच के साथ माता- पिता के जीवन में दस्तक देगें. भाई- बहन कोशिश तो बहुत करते थे. माता- पिता को नयी दिशा में ले जाने की लेकिन माता- पिता रह तो रहे थे. अभी भी गांव में ही गांव वालों के साथ ही चाचा- चाची के बीच ही. अगर मेरा बडा भाई पढाई में कोई कोर्स करना चाहें. तो दोनों टीचर्स चाचा माता- पिता के दिमाग में डर और भ्रम उत्पन्न करवा देते. तो माता- पिता भाई को मना कर देते थे कि तुझे यह कोर्स नहीं करना है. अगर मेरा बडा भाई गांव से बाहर किसी दुसरे शहर जाकर नोकरी करने की बात बोले तो माता- पिता भाई को गांव से बाहर भेजने के पहले या तो गांव वालों से पुछते थे. या फिर चाचा- चाचीयों से पुछते थे. और गांव वाले भी माता- पिता के दिमाग में उस शहर के नाम से डर भर देते थे. और अगर चाचाओं से पुछते तो चाचा भी डर और भ्रम उत्पन्न कर देते थे. डर और भ्रम के चलते फिर भईया भी जीवन में कुछ हासिल नहीं कर पायें. फिर भगवान ने देखा कि बच्चों के माध्यम से भी मेरे भक्त का जीवन सुधर नहीं पाया. तो अब इस बार भगवान ने सोचा कि अब मैं खुद ही मेरे भक्त के जीवन में जाउंगा. मैं भगवान नहीं हुं. लेकिन भगवान जैसे गुण मेरे भीतर भी है. मैं ऐसी आत्मा हुं. जिसे ईश्वर ने चुना है. सत्य और धर्म की रक्षा करने के लिए. और लोगों के जीवन में प्रकाश लाने के लिए. की सत्य कभी हार नहीं सकता है. हमेशा धर्म की ही विजय होगी. मैं लोगों के बीच रहकर लोगों की आंखों के सामने रहकर सत्य के मार्ग पर चल रहा हूं. धर्म के मार्ग पर चलकर अपने सपनों को पूरा करने निकला हुं. और भगवान मेरे माध्यम से लोगों को दिखाना चाहते हैं कि सत्य के मार्ग में संघर्ष आते हैं, कठिनाई आती है. परेशानी आती है. लेकिन अगर आपका मन सच्चा है. आपको भगवान पर पुर्ण विश्वास है. अपने सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत करने के लिए तैयार है. तो आप हर विपत्ती, हर परेशानी, हर तकलीफ को झेल सकते हो. क्योंकि आपको ईश्वर पर पुर्ण विश्वास है. कि ईश्वर आपको इन परेशानियों से बाहर निकाल देंगे. और यह भी सच है कि बीना संघर्ष बीना चुनौती के आप अपने सपनों को पूरा नहीं कर सकते हैं. और अगर मैं बीना चुनौती और संघर्षों के अपने सपनों को पूरा कर लेता हूं. तो फिर लोग मुझे जादुगर समझ लेंगे. या फिर लोग मुझे भी तांत्रिक विद्याओं से सपने पूरे करने वाला घोषित कर देंगे. जैसे भगवान राम विष्णु के अवतार थे. और माता सीता लक्ष्मी का अवतार थी. अगर वै दोनों अपने जीवन के संघर्षों में अपने असली स्वरूप या शक्तियों का इस्तेमाल करते तो. लोग उन्हें या तो जादुगर घोषित कर देते. नहीं तो तांत्रिक घोषित कर देते. फिर कोई भी व्यक्ति सत्य के धर्म के मार्ग पर नही चलता. फिर कोई भी भगवान पर विश्वास नहीं करता. तो अब भगवान ने देखा कि मेरे माता- पिता सत्य के मार्ग से विचलित हो रहें हैं. भगवान पर से विश्वास खतम हो रहा है. तो भगवान ने सत्य और धर्म को बचाने के लिए मेरे रुप में मेरे माता- पिता के घर जन्म लिया. अब भगवान ने जन्म लिया है. तो फिर उनका स्वरुप भी मनमोहक और आकर्षक ही होगा. और ऐसा था भी जब मेरा जन्म हुआ तो माता- पिता भाई- बहन सब खुश हो गए. क्योंकि इससे पहले माता- पिता दुखी रहते थे. क्योंकि मुझसे पहले मेरी चार बहनें और एक भाई थे. एक और लडके के चाहत में चार लडकियां हो गई थी. और मैं, अलग से गर्भ में था. तो मां की चाहत थी. कि एक और लडका हो जाएं. उसके बाद माता- पिता opretion करवां लेंगे. लेकिन दादी को चाचीयों ने भडकाया की फिर से लडकी ही होगी तो आप उससे कहो की गोलियां खाकर बच्चे को गीरा दें. तो दादी ने चाचीयों की बातों को सही मानकर मां को गालियां खाने के लिए बोल दिया. और मां भी दादी की बातों में आकर गोलियां खाने लगी. लेकिन मैं तो भगवान का अंश था. तो कैसे मर सकता था. मैं, तो नौ महीने गर्भ में रहने के बाद इस दुनिया में आया ही सही. और बाहर आते ही लोगों में खलबली मचा दी. क्योंकि भगवान का अंश है. तो फिर कोई साधारण मनुष्य थोडी होगा. तो अब जब में इस दुनिया में आया तो माता- पिता भाई- बहन तो खुश थे ही सही! साथ में गांव वाले भी खूश हो रहें थे. जैसे ही मोहल्ले वालों को पता चला. कि मां ने लडके को जन्म दिया है. तो लोग मुझे लडके की वजह से देखने नहीं आतें थे. लोग तो मेरे आकर्षण मेरे ओरा से मेरी तरफ खींचे चले आते थे. और तो और मेरा नाम भी मेरे चाचाओं ने ऐसा ही रखा है. दीपक जो सबके जीवन में उजाला करेगा. प्रकाश फेलाएगा. तो अब जब मोहल्ले की महिलाओं को पता चला कि मेरी मां ने एक लडके को जन्म दिया है. तो फिर मोहल्ले की महिलाएं मुझे देखने मेरे घर आयी. तो अब मैं तो भगवान का अंश हुं. तो मेरे चेहरे का तेज और आकर्षक महीलाओं को और भी ज्यादा आकर्षित करें. तो महीलाओं के मुंह से तो आकस्मात ही तारीफ निकलें. कि कितना प्यारा और सुंदर बच्चा है. सभी महीलाओं ने मुझे अपनी गोद में उठा लिया. और लाड प्यार करने लगी. और फिर थोडी देर बाद सभी महिलाएं अपने- अपने घर चली गई मेरा ओरा बहुत सक्रिय और आकर्षक है. तो मैं आसानी से किसी के मन से जल्दी निकलता नहीं हुं. एक बार कोई व्यक्ति मुझे देख ले. और मुझसे बातें कर लें. कि फिर वह मुझे खुद भी भुलाना चाहें तो भी मुझे भुल नहीं सकता है. खैर जब महिलाएं. अगले दिन खेतों में काम करने गई तो गांव की महिलाओं के साथ मेरी चाचीयां भी काम करने गई थी. अब जीन महिलाओं ने मुझे देखा था. अपनी गोद में उठाकर लाड प्यार किया था. वै महिलाएं मेरी तारीफ करने लगी. मेरी मां का नाम लेकर बोले कि उनका लडका कितना सुन्दर है. कितना प्यारा बच्चा है. कितना मनमोहक है. कितना अच्छा हैं. अब गांव की महिलाएं मेरी तारीफ करें. तो साथ में मेरी और मां की तारीफ भी होय. तो यह बात चाचीयों को रास नहीं आएं. की गांव की महिलाएं मेरी मां की तारीफ करें. या गांव की महिलाएं मेरी मां की साइड ले. तो मेरी चाचीयों ने फिर अपने बच्चों के बारे में बोलना शुरू किया. कि मेरा बच्चा भी ऐसा ही है. लेकिन गांव की महिलाएं, तो मेरी तारीफ करने में जैसे रम चुकी थी. जैसे उन्हें किसी और की बातें सुनाई ही नहीं दे. की उन्हें कोई कुछ कह भी रहा है. अब जब चाचीयों ने देखा कि महिलाएं उनकी किसी भी बात पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रही है. तो चाचीयों ने एक प्लान बनाया. कि अगर हम इसके बच्चें को ही मार दें तो फिर हमारी जेठानी की तारीफ कोई भी नहीं करेगा.

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