
एक सपना था आँखों में कहीं,
चुपके से पलता रातों में वहीं।
ना शोर था उसका, ना कोई नाम,
बस दिल को देता रहता पैगाम।
कभी चाँद बनकर चमक उठता,
कभी बारिश बनकर बरस पड़ता।
कभी हौसलों की लौ बन जाता,
कभी तन्हाई में साथ निभाता।
लोग कहते रहे...
“सपने अक्सर टूट जाया करते हैं…”
पर मेरा सपना हर बार
मुझे फिर से जीना सिखाया करता है।
जब दुनिया थका देती है,
वो उम्मीद बन मुस्कुराता है।
और जब दिल हारने लगता है,
वो धीरे से कहता है
“अभी मंज़िल बाकी है…”
एक सपना ही तो है
जो इंसान को इंसान बनाता है,
वरना सिर्फ साँस लेना
ज़िंदगी नहीं कहलाता है… ✨