
मान- से..
इमान- से.. .
सच्चे 'दिल' से.. . दिल-ओ-जान. . से
मै- तुमसे प्यार करती हूं
कहता है- ये दिल मेरा..
कहती है ये मेरे दिल की धड़कन.. .पूछ- लो ? ये जहान. .. से
मान- से..
इमान- से.. .
सच्चे 'दिल' से.. . दिल-ओ-जान. . से
मै- तुमसे प्यार करती हूं
कहता है- ये दिल मेरा..
कहती है ये मेरे दिल की धड़कन.. .पूछ- लो ? ये जहान. .. से
मान- से..
इमान- से.. .
सच्चे 'दिल' से.. . दिल-ओ-जान. . से ।
मै- तुमसे प्यार करती हूं ।. ..और, करती रहूंगी ।
जिंदगी-भर हमेशा
जिंदगी-भर हमेशा.. . यूं ही तुम्हें चाहूंगी । यूं ही तुमसे प्यार करूंगी ।
ये इरादा है ऐशा
ये-इरादा है.. ऐसा वादा है-ऐसा.. . हर- हाल में मैं तुमसे मिलूंगी
चाहे-कुछ भी हो मेरा हाल !
हर- हाल में मगर मैं ये इतना रखूंगी ख्याल !!
प्यार-कभी कम नहीं होगा । कभी-कम नहीं होगा दीवानापन ।
जिस्म-ओ-जान से
जिस्म-से..
जान-से.. .
बड़ी-ही शौक से.. . शान से. ..मैं तुमपे मरती हूं
कहता है ये मेरा मन..
कहता है ये मेरा तन-बदन.. . जान लो ये जान से
मान- से..
इमान- से.. .
सच्चे 'दिल' से.. . दिल-ओ-जान. . से
मै- तुमसे प्यार करती हूं
कहता है- ये दिल मेरा..
कहती है ये मेरे दिल की धड़कन.. .पूछ- लो ? ये जहान. .. से
"प्यार" जिंदगी- से भी ज्यादा.. .
तुम्हें-दूंगा/मैं-करूंगा । करता हू मैं ये वादा
करता हू मैं ये वादा..
प्यार एक सा निभाउंगा । सदा- सादा
खफा-कभी खुद से होने नहीं दूंगा.. . होने नहीं दूंगा । कभी खुद से जुदा ज्यादा
ज्यादा.. जाने- नही दूँगा । कभी खुद से दूर
तुम्हारी-ख़ातिर.. . तुम्हारी-हर खता भी होगी मुझे मंजूर
तुम-जो कभी रूठोगी भी अगर
. ..और,अगर रूठकर कभी कहीं चली जाओगी भी मुझसे दूर
तो- मैं-तुम्हें मना-पथा लुंगा.. . ले आउंगा लौटा के कहीं से भी इस जहान से
सोच- समझ कर.. .बड़ी-ही-ईत्मीनान से. ..बड़े ही मान, सम्मान से
यह-कह-कह के.. कि- सुनो जरा सुनो, सुनो-जरा-जरा- सुनो, सुनो- मेरी सजनी
मान लो ये मान से
३
जब- तक.. . "जिउंगी"
तुम्हारे-लिए.. .
तुम्हारे- लिए.. . तुम्हारी-ख़ातिर कुछ भी करूंगी/-कहूंगी
कुछ- भी ?.. . कह- लूंगी । कोई- भी बहाना बना लूगी ।
जब- तक.. . "जिउंगी"
तुम्हारे- लिए.. . जैसे-कि "तुम चाहोगे मिलूंगी । जरूरत- पड़ी तो चुप भी रहूंगी!
चुप- भी ?.. .रह- लूंगी ! जिंदगी- के हर-सितम
हर-दर्द, हंस-के चुपचाप सहूंगी । चुपचाप ?
...सह- लूंगी । पर,तुमसे-कभी झूठ नही बोलूंगी । तुम्हारे-लिए दिल के हर राज खोलूंगी
. ..जिउंगी/-मरुंगी । तुम्हारे- लिए तुम्हारी ख़ातिर, तुम्हारे लिए, तुम्हारी ख़ातिर कुछ भी कर जाउंगी
तुम्हारी खुशी की ख़ातिर प्यार की हद से भी गुजर जाउंगी ।पर, जीते-जी,तुम्हारा-कभी पीछा न छोडूंगी
न ही तुमसे कभी मुह-मोडू़ंगी
जीते-जी.. . तो तुम्हारा साथ तो कभी छूटेगा नही
जब- तक- तुम्हारा साथ रहेगा । तुम्हारे- हाथों में मेरा हाथ रहेगा ।।
. ..जीते जी ये रिश्ता कभी टूटेगा नही
मर के- भी कभी खत्म नहि होगा ये बंधन, धरती- आसमान से
रब- करे !.. . कोई- मुझसे झूठ न बोलवाए ।
करूंगी- बस ये इतने जतन । इस- दिल के अरमान से