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आधी रात का आखिरी फोन

फोन

…

📖 एपिसोड 1: रात 12 बजे की कॉल

रात के ठीक 11:55 बजे थे।

चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था। आसमान में काले बादल छाए हुए थे और तेज हवा के कारण पेड़ों की शाखाएँ अजीब आवाजें कर रही थीं।

राहुल अपने कमरे में अकेला बैठा मोबाइल चला रहा था। उसके माता-पिता एक शादी में गए हुए थे और घर पर वह अकेला था।

राहुल को भूत-प्रेत की कहानियों पर बिल्कुल विश्वास नहीं था। वह अक्सर अपने दोस्तों से कहता था कि दुनिया में भूत नहीं, सिर्फ इंसान होते हैं।

लेकिन उस रात उसके साथ जो होने वाला था, उसके बाद शायद वह जिंदगी भर ऐसा नहीं कह पाता।

रात के 12 बजे अचानक उसके मोबाइल की घंटी बजी।

ट्रिंग… ट्रिंग… ट्रिंग…

राहुल ने स्क्रीन पर देखा।

एक अनजान नंबर से कॉल आ रही थी।

उसने कॉल उठाई।

"हैलो… कौन बोल रहा है?"

दूसरी तरफ से कोई जवाब नहीं आया।

सिर्फ किसी के जोर-जोर से साँस लेने की आवाज सुनाई दे रही थी।

"हैलो! कौन है? बोलते क्यों नहीं?"

कुछ सेकंड बाद एक धीमी आवाज आई।

"राहुल…"

राहुल चौंक गया।

"तुम कौन हो? मेरा नाम कैसे जानते हो?"

दूसरी तरफ से फिर आवाज आई।

"दरवाजा मत खोलना…"

राहुल के चेहरे पर डर के बजाय गुस्सा आ गया।

"देखो, अगर मजाक कर रहे हो तो बंद करो!"

अचानक फोन पर किसी लड़की के रोने की आवाज आने लगी।

"प्लीज… मुझे बचा लो… वह मेरे पीछे है…"

राहुल ने घबराकर पूछा, "कौन तुम्हारे पीछे है?"

लड़की ने काँपती हुई आवाज में कहा—

"वह आदमी… जिसके चेहरे पर आँखें नहीं हैं!"

राहुल के हाथ से लगभग मोबाइल छूट गया।

तभी कॉल कट गई।

उसने घड़ी देखी।

12:03 बजे थे।

राहुल ने खुद को समझाया कि कोई दोस्त उसके साथ मजाक कर रहा होगा। वह दोबारा मोबाइल देखने लगा।

लेकिन तभी…

ठक… ठक… ठक…

मुख्य दरवाजे पर दस्तक हुई।

राहुल की उँगलियाँ स्क्रीन पर रुक गईं।

इतनी रात को कौन आया होगा?

वह धीरे-धीरे दरवाजे के पास पहुँचा।

"कौन है?"

बाहर से एक लड़की की आवाज आई।

"भैया… दरवाजा खोलो। मुझे बहुत डर लग रहा है।"

राहुल का दिल तेजी से धड़कने लगा।

यह वही आवाज थी, जो कुछ देर पहले फोन पर सुनाई दी थी।

उसने दरवाजे के पास लगी छोटी सी खिड़की से बाहर देखने की कोशिश की।

बाहर एक लड़की खड़ी थी।

उसने सफेद कपड़े पहने हुए थे। उसके लंबे बाल चेहरे पर बिखरे हुए थे और उसके पैर नंगे थे।

"कौन हो तुम?" राहुल ने पूछा।

लड़की ने धीरे से अपना चेहरा ऊपर उठाया।

"मुझे अंदर आने दो… वह मुझे मार डालेगा।"

राहुल को उस पर दया आ गई। उसने दरवाजे की कुंडी खोलने के लिए हाथ बढ़ाया।

लेकिन तभी उसके मोबाइल पर एक मैसेज आया।

मैसेज उसी अनजान नंबर से था।

उसमें लिखा था—

"राहुल, दरवाजा मत खोलना। बाहर खड़ी लड़की इंसान नहीं है!"

राहुल के हाथ वहीं रुक गए।

उसने डरते हुए फिर खिड़की से बाहर देखा।

लड़की अब भी दरवाजे के सामने खड़ी थी।

लेकिन इस बार वह रो नहीं रही थी।

वह मुस्कुरा रही थी।

एक ऐसी मुस्कान, जिसे देखकर राहुल की रीढ़ में ठंडक दौड़ गई।

अचानक लड़की ने अपना सिर एक तरफ झुका लिया।

फिर दूसरी तरफ।

फिर उसका सिर धीरे-धीरे घूमने लगा।

इतना घूमने लगा कि उसका चेहरा पूरी तरह पीछे की ओर हो गया।

राहुल चीखते हुए पीछे गिर पड़ा।

बाहर से आवाज आई—

"राहुल… तुमने मुझे पहचान क्यों नहीं लिया?"

राहुल काँपने लगा।

"क-कौन हो तुम?"

लड़की की हँसी पूरे घर में गूँजने लगी।

"मैं वही हूँ… जिसे तुमने पाँच साल पहले मरने के लिए छोड़ दिया था!"

राहुल की आँखें फैल गईं।

पाँच साल पहले…

एक भयानक सड़क हादसा हुआ था।

उस हादसे में उसकी छोटी बहन रिया की मौत हो गई थी।

लेकिन रिया तो मर चुकी थी!

फिर दरवाजे के बाहर कौन खड़ा था?

अचानक घर की सारी लाइटें बंद हो गईं।

मोबाइल की स्क्रीन अपने आप जल उठी।

उस पर एक नया मैसेज था।

"राहुल, मैं तुम्हारी बहन रिया हूँ। दरवाजे के बाहर जो खड़ी है, वह तुम्हें मारने आई है। मैं तुम्हें बचाने की कोशिश कर रही हूँ।"

राहुल की साँसें रुकने लगीं।

अगर बाहर खड़ी लड़की रिया नहीं थी…

तो वह कौन थी?

तभी उसके कमरे के अंदर से किसी ने फुसफुसाकर कहा—

"भैया… फोन नीचे रख दो। मैं बाहर नहीं, तुम्हारे पीछे खड़ी हूँ।"

राहुल ने धीरे-धीरे गर्दन घुमाई।

उसके पीछे एक लड़की खड़ी थी।

सफेद कपड़े… लंबे बाल… और चेहरा बिल्कुल उसकी बहन रिया जैसा।

लेकिन उसकी आँखें पूरी तरह काली थीं।

वह मुस्कुराई और बोली—

"अब बताओ भैया… तुम किसे बचाओगे? मुझे… या खुद को?"

उसी पल दरवाजे पर जोरदार धमाका हुआ।

धड़ाम!

और फिर पूरे घर में एक साथ दो आवाजें गूँज उठीं—

"राहुल… दरवाजा खोलो!"

"राहुल… मेरी तरफ देखो!"

राहुल ने अपना सिर दोनों हाथों से पकड़ लिया।

उसे समझ नहीं आ रहा था कि असली रिया कौन है।

तभी मोबाइल पर आखिरी मैसेज आया।

"राहुल, सुबह होने से पहले हममें से किसी एक को तुम्हारी जान लेनी होगी। और याद रखना… जो तुम्हें सबसे ज्यादा प्यार दिखाए, उसी से सबसे ज्यादा बचना!"

अचानक मोबाइल बंद हो गया।

घड़ी में रात के 12:13 बज रहे थे।

और राहुल के सामने खड़ी दोनों लड़कियाँ एक साथ हँसने लगीं।

कहानी अभी खत्म नहीं हुई है… क्योंकि उस रात राहुल के घर से सिर्फ एक ही इंसान बाहर निकलने वाला था।

👻 आगे क्या होगा?

क्या राहुल असली रिया को पहचान पाएगा?

दरवाजे के बाहर खड़ी लड़की कौन है?

पाँच साल पहले हुए हादसे का असली सच क्या था?

और सबसे बड़ा सवाल… अगर रिया मर चुकी है, तो राहुल के मोबाइल पर मैसेज कौन भेज रहा है?

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