ये जीवन व्यर्थ नहीं जाने दूंगा
अपनी अस्मिता पर तनिक आंच ना आने दूंगा
आये जितनी बाधाए, घेरे चाहे प्रलय की घोर घटाये
पीछे मुड़कर ना देखूंगा, ना हाथो पर हाथ धरे बैठूंगा,
हर सांस लडूंगा, हर सांस जीऊंगा,
चाहे करना हों अनंत जदोजहद,
पार करनी हों हर हद, मै रण का मैदान छोड़ ना भागूँगा, ये जीवन व्यर्थ नहीं जाने दूंगा