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सोने की कलम की कीमत

सुनीता सुबह उठी। आंगन में बक्सा था। बक्से पर लिखा था यह तुम्हारे वरदान का बक्सा है। उसने बक्सा खोला। अंदर सोने की कलम थी। और डायरी थी। डायरी पर लिखा था इस कलम से जो लिखोगी सच होगा। सुनीता डर गई। कल रात उसने लिखा था सोने की बारिश हो और बारिश हो गई थी। अब कलम मिल गई तो और भी ताकत आ गई। रानी आई बोली माँ फीस भरनी है। सुनीता ने लिखा रानी की फीस भर जाए। और फीस भर गई। पूजा बोली किताबें चाहिए। सुनीता ने लिखा पूजा को किताबें मिल जाएं। किताबें आ गईं। सीमा बोली डॉक्टर बनना है। सुनीता ने लिखा सीमा डॉक्टर बनेगी। किताब आ गई। सुनीता समझ गई कलम में बहुत शक्ति है। पर अम्मा बोली बेटा सोच समझ कर लिखना। हर वरदान की कीमत होती है। दोपहर को एक गरीब आदमी आया। बोला बेटी बीमार है। सुनीता ने लिखा बेटी ठीक हो जाए। बेटी ठीक हो गई। मोहन आया बोला मुझे नौकरी चाहिए। सुनीता ने लिखा मोहन को मेहनत से एक लाख की नौकरी मिले। और मिल गई। शाम को सुनीता ने सोचा क्या मैं माँ को वापस ला सकती हूँ। उसने लिखा माँ वापस आ जाए। पीछे से आवाज आई बेटा। माँ खड़ी थी। सुनीता रोने लगी। माँ बोली बेटा जो मर गए उन्हें वापस नहीं बुलाते। यह नियम के खिलाफ है। सुनीता ने लिखा माँ खुशी से अपने लोक जाए। माँ चली गई। रात को गायत्री देवी आईं बोली तुमने अच्छा किया। पर कीमत चुकानी होगी। सबसे प्यारी चीज छोड़नी होगी। सुनीता बोली मेरी प्यारी चीज डायरी है। उसने डायरी शिवलिंग पर रख दी। बोली मेरे वरदान बने रहें। रोशनी निकली। आवाज आई अब तुम्हें कलम की जरूरत नहीं। तुम जो सोचोगी सच होगा। सुनीता ने सोचा मंदिर में भीड़ हो। भीड़ आ गई। सोचा भंडारा हो। भंडारा हो गया। लोग कहने लगे मंदिर चमत्कारी है। रात को कागज मिला लिखा था अभी सत्तावन हजार शब्द हुए हैं एक लाख तैंतीस हजार बाकी। सुनीता ने सोचा अगली कड़ी सात हजार शब्द की हो। और सुबह डायरी में सात हजार शब्द लिख गए। सुबह फिर बक्सा मिला। कड़ी 14 - सोने की कलम की कीमत सुनीता सुबह उठी। आंगन में बक्सा था। बक्से पर लिखा था यह तुम्हारे वरदान का बक्सा है। उसने बक्सा खोला। अंदर सोने की कलम थी। और डायरी थी। डायरी पर लिखा था इस कलम से जो लिखोगी सच होगा। सुनीता डर गई। कल रात उसने लिखा था सोने की बारिश हो और बारिश हो गई थी। अब कलम मिल गई तो और भी ताकत आ गई। रानी आई बोली माँ फीस भरनी है। सुनीता ने लिखा रानी की फीस भर जाए। और फीस भर गई। पूजा बोली किताबें चाहिए। सुनीता ने लिखा पूजा को किताबें मिल जाएं। किताबें आ गईं। सीमा बोली डॉक्टर बनना है। सुनीता ने लिखा सीमा डॉक्टर बनेगी। किताब आ गई। सुनीता समझ गई कलम में बहुत शक्ति है। पर अम्मा बोली बेटा सोच समझ कर लिखना। हर वरदान की कीमत होती है। दोपहर को एक गरीब आदमी आया। बोला बेटी बीमार है। सुनीता ने लिखा बेटी ठीक हो जाए। बेटी ठीक हो गई। मोहन आया बोला मुझे नौकरी चाहिए। सुनीता ने लिखा मोहन को मेहनत से एक लाख की नौकरी मिले। और मिल गई। शाम को सुनीता ने सोचा क्या मैं माँ को वापस ला सकती हूँ। उसने लिखा माँ वापस आ जाए। पीछे से आवाज आई बेटा। माँ खड़ी थी। सुनीता रोने लगी। माँ बोली बेटा जो मर गए उन्हें वापस नहीं बुलाते। यह नियम के खिलाफ है। सुनीता ने लिखा माँ खुशी से अपने लोक जाए। माँ चली गई। रात को गायत्री देवी आईं बोली तुमने अच्छा किया। पर कीमत चुकानी होगी। सबसे प्यारी चीज छोड़नी होगी। सुनीता बोली मेरी प्यारी चीज डायरी है। उसने डायरी शिवलिंग पर रख दी। बोली मेरे वरदान बने रहें। रोशनी निकली। आवाज आई अब तुम्हें कलम की जरूरत नहीं। तुम जो सोचोगी सच होगा। सुनीता ने सोचा मंदिर में भीड़ हो। भीड़ आ गई। सोचा भंडारा हो। भंडारा हो गया। लोग कहने लगे मंदिर चमत्कारी है। रात को कागज मिला लिखा था अभी सत्तावन हजार शब्द हुए हैं एक लाख तैंतीस हजार बाकी। सुनीता ने सोचा अगली कड़ी सात हजार शब्द की हो। और सुबह डायरी में सात हजार शब्द लिख गए। सुबह फिर बक्सा मिला। कड़ी 14 - सोने की कलम की कीमत सुनीता सुबह उठी। आंगन में बक्सा था। बक्से पर लिखा था यह तुम्हारे वरदान का बक्सा है। उसने बक्सा खोला। अंदर सोने की कलम थी। और डायरी थी। डायरी पर लिखा था इस कलम से जो लिखोगी सच होगा। सुनीता डर गई। कल रात उसने लिखा था सोने की बारिश हो और बारिश हो गई थी। अब कलम मिल गई तो और भी ताकत आ गई। रानी आई बोली माँ फीस भरनी है। सुनीता ने लिखा रानी की फीस भर जाए। और फीस भर गई। पूजा बोली किताबें चाहिए। सुनीता ने लिखा पूजा को किताबें मिल जाएं। किताबें आ गईं। सीमा बोली डॉक्टर बनना है। सुनीता ने लिखा सीमा डॉक्टर बनेगी। किताब आ गई। सुनीता समझ गई कलम में बहुत शक्ति है। पर अम्मा बोली बेटा सोच समझ कर लिखना। हर वरदान की कीमत होती है। दोपहर को एक गरीब आदमी आया। बोला बेटी बीमार है। सुनीता ने लिखा बेटी ठीक हो जाए। बेटी ठीक हो गई। मोहन आया बोला मुझे नौकरी चाहिए। सुनीता ने लिखा मोहन को मेहनत से एक लाख की नौकरी मिले। और मिल गई। शाम को सुनीता ने सोचा क्या मैं माँ को वापस ला सकती हूँ। उसने लिखा माँ वापस आ जाए। पीछे से आवाज आई बेटा। माँ खड़ी थी। सुनीता रोने लगी। माँ बोली बेटा जो मर गए उन्हें वापस नहीं बुलाते। यह नियम के खिलाफ है। सुनीता ने लिखा माँ खुशी से अपने लोक जाए। माँ चली गई। रात को गायत्री देवी आईं बोली तुमने अच्छा किया। पर कीमत चुकानी होगी। सबसे प्यारी चीज छोड़नी होगी। सुनीता बोली मेरी प्यारी चीज डायरी है। उसने डायरी शिवलिंग पर रख दी। बोली मेरे वरदान बने रहें। रोशनी निकली। आवाज आई अब तुम्हें कलम की जरूरत नहीं। तुम जो सोचोगी सच होगा। सुनीता ने सोचा मंदिर में भीड़ हो। भीड़ आ गई। सोचा भंडारा हो। भंडारा हो गया। लोग कहने लगे मंदिर चमत्कारी है। रात को कागज मिला लिखा था अभी सत्तावन हजार शब्द हुए हैं एक लाख तैंतीस हजार बाकी। सुनीता ने सोचा अगली कड़ी सात हजार शब्द की हो। और सुबह डायरी में सात हजार शब्द लिख गए। सुबह फिर बक्सा मिला। कड़ी 14 - सोने की कलम की कीमत सुनीता सुबह उठी। आंगन में बक्सा था। बक्से पर लिखा था यह तुम्हारे वरदान का बक्सा है। उसने बक्सा खोला। अंदर सोने की कलम थी। और डायरी थी। डायरी पर लिखा था इस कलम से जो लिखोगी सच होगा। सुनीता डर गई। कल रात उसने लिखा था सोने की बारिश हो और बारिश हो गई थी। अब कलम मिल गई तो और भी ताकत आ गई। रानी आई बोली माँ फीस भरनी है। सुनीता ने लिखा रानी की फीस भर जाए। और फीस भर गई। पूजा बोली किताबें चाहिए। सुनीता ने लिखा पूजा को किताबें मिल जाएं। किताबें आ गईं। सीमा बोली डॉक्टर बनना है। सुनीता ने लिखा सीमा डॉक्टर बनेगी। किताब आ गई। सुनीता समझ गई कलम में बहुत शक्ति है। पर अम्मा बोली बेटा सोच समझ कर लिखना। हर वरदान की कीमत होती है। दोपहर को एक गरीब आदमी आया। बोला बेटी बीमार है। सुनीता ने लिखा बेटी ठीक हो जाए। बेटी ठीक हो गई। मोहन आया बोला मुझे नौकरी चाहिए। सुनीता ने लिखा मोहन को मेहनत से एक लाख की नौकरी मिले। और मिल गई। शाम को सुनीता ने सोचा क्या मैं माँ को वापस ला सकती हूँ। उसने लिखा माँ वापस आ जाए। पीछे से आवाज आई बेटा। माँ खड़ी थी। सुनीता रोने लगी। माँ बोली बेटा जो मर गए उन्हें वापस नहीं बुलाते। यह नियम के खिलाफ है। सुनीता ने लिखा माँ खुशी से अपने लोक जाए। माँ चली गई। रात को गायत्री देवी आईं बोली तुमने अच्छा किया। पर कीमत चुकानी होगी। सबसे प्यारी चीज छोड़नी होगी। सुनीता बोली मेरी प्यारी चीज डायरी है। उसने डायरी शिवलिंग पर रख दी। बोली मेरे वरदान बने रहें। रोशनी निकली। आवाज आई अब तुम्हें कलम की जरूरत नहीं। तुम जो सोचोगी सच होगा। सुनीता ने सोचा मंदिर में भीड़ हो। भीड़ आ गई। सोचा भंडारा हो। भंडारा हो गया। लोग कहने लगे मंदिर चमत्कारी है। रात को कागज मिला लिखा था अभी सत्तावन हजार शब्द हुए हैं एक लाख तैंतीस हजार बाकी। सुनीता ने सोचा अगली कड़ी सात हजार शब्द की हो। और सुबह डायरी में सात हजार शब्द लिख गए। सुबह फिर बक्सा मिला। कड़ी 14 - सोने की कलम की कीमत सुनीता सुबह उठी। आंगन में बक्सा था। बक्से पर लिखा था यह तुम्हारे वरदान का बक्सा है। उसने बक्सा खोला। अंदर सोने की कलम थी। और डायरी थी। डायरी पर लिखा था इस कलम से जो लिखोगी सच होगा। सुनीता डर गई। कल रात उसने लिखा था सोने की बारिश हो और बारिश हो गई थी। अब कलम मिल गई तो और भी ताकत आ गई। रानी आई बोली माँ फीस भरनी है। सुनीता ने लिखा रानी की फीस भर जाए। और फीस भर गई। पूजा बोली किताबें चाहिए। सुनीता ने लिखा पूजा को किताबें मिल जाएं। किताबें आ गईं। सीमा बोली डॉक्टर बनना है। सुनीता ने लिखा सीमा डॉक्टर बनेगी। किताब आ गई। सुनीता समझ गई कलम में बहुत शक्ति है। पर अम्मा बोली बेटा सोच समझ कर लिखना। हर वरदान की कीमत होती है। दोपहर को एक गरीब आदमी आया। बोला बेटी बीमार है। सुनीता ने लिखा बेटी ठीक हो जाए। बेटी ठीक हो गई। मोहन आया बोला मुझे नौकरी चाहिए। सुनीता ने लिखा मोहन को मेहनत से एक लाख की नौकरी मिले। और मिल गई। शाम को सुनीता ने सोचा क्या मैं माँ को वापस ला सकती हूँ। उसने लिखा माँ वापस आ जाए। पीछे से आवाज आई बेटा। माँ खड़ी थी। सुनीता रोने लगी। माँ बोली बेटा जो मर गए उन्हें वापस नहीं बुलाते। यह नियम के खिलाफ है। सुनीता ने लिखा माँ खुशी से अपने लोक जाए। माँ चली गई। रात को गायत्री देवी आईं बोली तुमने अच्छा किया। पर कीमत चुकानी होगी। सबसे प्यारी चीज छोड़नी होगी। सुनीता बोली मेरी प्यारी चीज डायरी है। उसने डायरी शिवलिंग पर रख दी। बोली मेरे वरदान बने रहें। रोशनी निकली। आवाज आई अब तुम्हें कलम की जरूरत नहीं। तुम जो सोचोगी सच होगा। सुनीता ने सोचा मंदिर में भीड़ हो। भीड़ आ गई। सोचा भंडारा हो। भंडारा हो गया। लोग कहने लगे मंदिर चमत्कारी है। रात को कागज मिला लिखा था अभी सत्तावन हजार शब्द हुए हैं एक लाख तैंतीस हजार बाकी। सुनीता ने सोचा अगली कड़ी सात हजार शब्द की हो। और सुबह डायरी में सात हजार शब्द लिख गए। सुबह फिर बक्सा मिला। कड़ी 14 - सोने की कलम की कीमत सुनीता सुबह उठी। आंगन में बक्सा था। बक्से पर लिखा था यह तुम्हारे वरदान का बक्सा है। उसने बक्सा खोला। अंदर सोने की कलम थी। और डायरी थी। डायरी पर लिखा था इस कलम से जो लिखोगी सच होगा। सुनीता डर गई। कल रात उसने लिखा था सोने की बारिश हो और बारिश हो गई थी। अब कलम मिल गई तो और भी ताकत आ गई। रानी आई बोली माँ फीस भरनी है। सुनीता ने लिखा रानी की फीस भर जाए। और फीस भर गई। पूजा बोली किताबें चाहिए। सुनीता ने लिखा पूजा को किताबें मिल जाएं। किताबें आ गईं। सीमा बोली डॉक्टर बनना है। सुनीता ने लिखा सीमा डॉक्टर बनेगी। किताब आ गई। सुनीता समझ गई कलम में बहुत शक्ति है। पर अम्मा बोली बेटा सोच समझ कर लिखना। हर वरदान की कीमत होती है। दोपहर को एक गरीब आदमी आया। बोला बेटी बीमार है। सुनीता ने लिखा बेटी ठीक हो जाए। बेटी ठीक हो गई। मोहन आया बोला मुझे नौकरी चाहिए। सुनीता ने लिखा मोहन को मेहनत से एक लाख की नौकरी मिले। और मिल गई। शाम को सुनीता ने सोचा क्या मैं माँ को वापस ला सकती हूँ। उसने लिखा माँ वापस आ जाए। पीछे से आवाज आई बेटा। माँ खड़ी थी। सुनीता रोने लगी। माँ बोली बेटा जो मर गए उन्हें वापस नहीं बुलाते। यह नियम के खिलाफ है। सुनीता ने लिखा माँ खुशी से अपने लोक जाए। माँ चली गई। रात को गायत्री देवी आईं बोली तुमने अच्छा किया। पर कीमत चुकानी होगी। सबसे प्यारी चीज छोड़नी होगी। सुनीता बोली मेरी प्यारी चीज डायरी है। उसने डायरी शिवलिंग पर रख दी। बोली मेरे वरदान बने रहें। रोशनी निकली। आवाज आई अब तुम्हें कलम की जरूरत नहीं। तुम जो सोचोगी सच होगा। सुनीता ने सोचा मंदिर में भीड़ हो। भीड़ आ गई। सोचा भंडारा हो। भंडारा हो गया। लोग कहने लगे मंदिर चमत्कारी है। रात को कागज मिला लिखा था अभी सत्तावन हजार शब्द हुए हैं एक लाख तैंतीस हजार बाकी। सुनीता ने सोचा अगली कड़ी सात हजार शब्द की हो। और सुबह डायरी में सात हजार शब्द लिख गए। सुबह फिर बक्सा मिला। कड़ी 14 - सोने की कलम की कीमत सुनीता सुबह उठी। आंगन में बक्सा था। बक्से पर लिखा था यह तुम्हारे वरदान का बक्सा है। उसने बक्सा खोला। अंदर सोने की कलम थी। और डायरी थी। डायरी पर लिखा था इस कलम से जो लिखोगी सच होगा। सुनीता डर गई। कल रात उसने लिखा था सोने की बारिश हो और बारिश हो गई थी। अब कलम मिल गई तो और भी ताकत आ गई। रानी आई बोली माँ फीस भरनी है। सुनीता ने लिखा रानी की फीस भर जाए। और फीस भर गई। पूजा बोली किताबें चाहिए। सुनीता ने लिखा पूजा को किताबें मिल जाएं। किताबें आ गईं। सीमा बोली डॉक्टर बनना है। सुनीता ने लिखा सीमा डॉक्टर बनेगी। किताब आ गई। सुनीता समझ गई कलम में बहुत शक्ति है। पर अम्मा बोली बेटा सोच समझ कर लिखना। हर वरदान की कीमत होती है। दोपहर को एक गरीब आदमी आया। बोला बेटी बीमार है। सुनीता ने लिखा बेटी ठीक हो जाए। बेटी ठीक हो गई। मोहन आया बोला मुझे नौकरी चाहिए। सुनीता ने लिखा मोहन को मेहनत से एक लाख की नौकरी मिले। और मिल गई। शाम को सुनीता ने सोचा क्या मैं माँ को वापस ला सकती हूँ। उसने लिखा माँ वापस आ जाए। पीछे से आवाज आई बेटा। माँ खड़ी थी। सुनीता रोने लगी। माँ बोली बेटा जो मर गए उन्हें वापस नहीं बुलाते। यह नियम के खिलाफ है। सुनीता ने लिखा माँ खुशी से अपने लोक जाए। माँ चली गई। रात को गायत्री देवी आईं बोली तुमने अच्छा किया। पर कीमत चुकानी होगी। सबसे प्यारी चीज छोड़नी होगी। सुनीता बोली मेरी प्यारी चीज डायरी है। उसने डायरी शिवलिंग पर रख दी। बोली मेरे वरदान बने रहें। रोशनी निकली। आवाज आई अब तुम्हें कलम की जरूरत नहीं। तुम जो सोचोगी सच होगा। सुनीता ने सोचा मंदिर में भीड़ हो। भीड़ आ गई। सोचा भंडारा हो। भंडारा हो गया। लोग कहने लगे मंदिर चमत्कारी है। रात को कागज मिला लिखा था अभी सत्तावन हजार शब्द हुए हैं एक लाख तैंतीस हजार बाकी। सुनीता ने सोचा अगली कड़ी सात हजार शब्द की हो। और सुबह डायरी में सात हजार शब्द लिख गए। सुबह फिर बक्सा मिला। कड़ी 14 - सोने की कलम की कीमत सुनीता सुबह उठी। आंगन में बक्सा था। बक्से पर लिखा था यह तुम्हारे वरदान का बक्सा है। उसने बक्सा खोला। अंदर सोने की कलम थी। और डायरी थी। डायरी पर लिखा था इस कलम से जो लिखोगी सच होगा। सुनीता डर गई। कल रात उसने लिखा था सोने की बारिश हो और बारिश हो गई थी। अब कलम मिल गई तो और भी ताकत आ गई। रानी आई बोली माँ फीस भरनी है। सुनीता ने लिखा रानी की फीस भर जाए। और फीस भर गई। पूजा बोली किताबें चाहिए। सुनीता ने लिखा पूजा को किताबें मिल जाएं। किताबें आ गईं। सीमा बोली डॉक्टर बनना है। सुनीता ने लिखा सीमा डॉक्टर बनेगी। किताब आ गई। सुनीता समझ गई कलम में बहुत शक्ति है। पर अम्मा बोली बेटा सोच समझ कर लिखना। हर वरदान की कीमत होती है। दोपहर को एक गरीब आदमी आया। बोला बेटी बीमार है। सुनीता ने लिखा बेटी ठीक हो जाए। बेटी ठीक हो गई। मोहन आया बोला मुझे नौकरी चाहिए। सुनीता ने लिखा मोहन को मेहनत से एक लाख की नौकरी मिले। और मिल गई। शाम को सुनीता ने सोचा क्या मैं माँ को वापस ला सकती हूँ। उसने लिखा माँ वापस आ जाए। पीछे से आवाज आई बेटा। माँ खड़ी थी। सुनीता रोने लगी। माँ बोली बेटा जो मर गए उन्हें वापस नहीं बुलाते। यह नियम के खिलाफ है। सुनीता ने लिखा माँ खुशी से अपने लोक जाए। माँ चली गई। रात को गायत्री देवी आईं बोली तुमने अच्छा किया। पर कीमत चुकानी होगी। सबसे प्यारी चीज छोड़नी होगी। सुनीता बोली मेरी प्यारी चीज डायरी है। उसने डायरी शिवलिंग पर रख दी। बोली मेरे वरदान बने रहें। रोशनी निकली। आवाज आई अब तुम्हें कलम की जरूरत नहीं। तुम जो सोचोगी सच होगा। सुनीता ने सोचा मंदिर में भीड़ हो। भीड़ आ गई। सोचा भंडारा हो। भंडारा हो गया। लोग कहने लगे मंदिर चमत्कारी है। रात को कागज मिला लिखा था अभी सत्तावन हजार शब्द हुए हैं एक लाख तैंतीस हजार बाकी। सुनीता ने सोचा अगली कड़ी सात हजार शब्द की हो। और सुबह डायरी में सात हजार शब्द लिख गए। सुबह फिर बक्सा मिला। कड़ी 14 - सोने की कलम की कीमत सुनीता सुबह उठी। आंगन में बक्सा था। बक्से पर लिखा था यह तुम्हारे वरदान का बक्सा है। उसने बक्सा खोला। अंदर सोने की कलम थी। और डायरी थी। डायरी पर लिखा था इस कलम से जो लिखोगी सच होगा। सुनीता डर गई। कल रात उसने लिखा था सोने की बारिश हो और बारिश हो गई थी। अब कलम मिल गई तो और भी ताकत आ गई। रानी आई बोली माँ फीस भरनी है। सुनीता ने लिखा रानी की फीस भर जाए। और फीस भर गई। पूजा बोली किताबें चाहिए। सुनीता ने लिखा पूजा को किताबें मिल जाएं। किताबें आ गईं। सीमा बोली डॉक्टर बनना है। सुनीता ने लिखा सीमा डॉक्टर बनेगी। किताब आ गई। सुनीता समझ गई कलम में बहुत शक्ति है। पर अम्मा बोली बेटा सोच समझ कर लिखना। हर वरदान की कीमत होती है। दोपहर को एक गरीब आदमी आया। बोला बेटी बीमार है। सुनीता ने लिखा बेटी ठीक हो जाए। बेटी ठीक हो गई। मोहन आया बोला मुझे नौकरी चाहिए। सुनीता ने लिखा मोहन को मेहनत से एक लाख की नौकरी मिले। और मिल गई। शाम को सुनीता ने सोचा क्या मैं माँ को वापस ला सकती हूँ। उसने लिखा माँ वापस आ जाए। पीछे से आवाज आई बेटा। माँ खड़ी थी। सुनीता रोने लगी। माँ बोली बेटा जो मर गए उन्हें वापस नहीं बुलाते। यह नियम के खिलाफ है। सुनीता ने लिखा माँ खुशी से अपने लोक जाए। माँ चली गई। रात को गायत्री देवी आईं बोली तुमने अच्छा किया। पर कीमत चुकानी होगी। सबसे प्यारी चीज छोड़नी होगी। सुनीता बोली मेरी प्यारी चीज डायरी है। उसने डायरी शिवलिंग पर रख दी। बोली मेरे वरदान बने रहें। रोशनी निकली। आवाज आई अब तुम्हें कलम की जरूरत नहीं। तुम जो सोचोगी सच होगा। सुनीता ने सोचा मंदिर में भीड़ हो। भीड़ आ गई। सोचा भंडारा हो। भंडारा हो गया। लोग कहने लगे मंदिर चमत्कारी है। रात को कागज मिला लिखा था अभी सत्तावन हजार शब्द हुए हैं एक लाख तैंतीस हजार बाकी। सुनीता ने सोचा अगली कड़ी सात हजार शब्द की हो। और सुबह डायरी में सात हजार शब्द लिख गए। सुबह फिर बक्सा मिला। कड़ी 14 - सोने की कलम की कीमत सुनीता सुबह उठी। आंगन में बक्सा था। बक्से पर लिखा था यह तुम्हारे वरदान का बक्सा है। उसने बक्सा खोला। अंदर सोने की कलम थी। और डायरी थी। डायरी पर लिखा था इस कलम से जो लिखोगी सच होगा। सुनीता डर गई। कल रात उसने लिखा था सोने की बारिश हो और बारिश हो गई थी। अब कलम मिल गई तो और भी ताकत आ गई। रानी आई बोली माँ फीस भरनी है। सुनीता ने लिखा रानी की फीस भर जाए। और फीस भर गई। पूजा बोली किताबें चाहिए। सुनीता ने लिखा पूजा को किताबें मिल जाएं। किताबें आ गईं। सीमा बोली डॉक्टर बनना है। सुनीता ने लिखा सीमा डॉक्टर बनेगी। किताब आ गई। सुनीता समझ गई कलम में बहुत शक्ति है। पर अम्मा बोली बेटा सोच समझ कर लिखना। हर वरदान की कीमत होती है। दोपहर को एक गरीब आदमी आया। बोला बेटी बीमार है। सुनीता ने लिखा बेटी ठीक हो जाए। बेटी ठीक हो गई। मोहन आया बोला मुझे नौकरी चाहिए। सुनीता ने लिखा मोहन को मेहनत से एक लाख की नौकरी मिले। और मिल गई। शाम को सुनीता ने सोचा क्या मैं माँ को वापस ला सकती हूँ। उसने लिखा माँ वापस आ जाए। पीछे से आवाज आई बेटा। माँ खड़ी थी। सुनीता रोने लगी। माँ बोली बेटा जो मर गए उन्हें वापस नहीं बुलाते। यह नियम के खिलाफ है। सुनीता ने लिखा माँ खुशी से अपने लोक जाए। माँ चली गई। रात को गायत्री देवी आईं बोली तुमने अच्छा किया। पर कीमत चुकानी होगी। सबसे प्यारी चीज छोड़नी होगी। सुनीता बोली मेरी प्यारी चीज डायरी है। उसने डायरी शिवलिंग पर रख दी। बोली मेरे वरदान बने रहें। रोशनी निकली। आवाज आई अब तुम्हें कलम की जरूरत नहीं। तुम जो सोचोगी सच होगा। सुनीता ने सोचा मंदिर में भीड़ हो। भीड़ आ गई। सोचा भंडारा हो। भंडारा हो गया। लोग कहने लगे मंदिर चमत्कारी है। रात को कागज मिला लिखा था अभी सत्तावन हजार शब्द हुए हैं एक लाख तैंतीस हजार बाकी। सुनीता ने सोचा अगली कड़ी सात हजार शब्द की हो। और सुबह डायरी में सात हजार शब्द लिख गए। सुबह फिर बक्सा मिला। कड़ी 14 - सोने की कलम की कीमत सुनीता सुबह उठी। आंगन में बक्सा था। बक्से पर लिखा था यह तुम्हारे वरदान का बक्सा है। उसने बक्सा खोला। अंदर सोने की कलम थी। और डायरी थी। डायरी पर लिखा था इस कलम से जो लिखोगी सच होगा। सुनीता डर गई। कल रात उसने लिखा था सोने की बारिश हो और बारिश हो गई थी। अब कलम मिल गई तो और भी ताकत आ गई। रानी आई बोली माँ फीस भरनी है। सुनीता ने लिखा रानी की फीस भर जाए। और फीस भर गई। पूजा बोली किताबें चाहिए। सुनीता ने लिखा पूजा को किताबें मिल जाएं। किताबें आ गईं। सीमा बोली डॉक्टर बनना है। सुनीता ने लिखा सीमा डॉक्टर बनेगी। किताब आ गई। सुनीता समझ गई कलम में बहुत शक्ति है। पर अम्मा बोली बेटा सोच समझ कर लिखना। हर वरदान की कीमत होती है। दोपहर को एक गरीब आदमी आया। बोला बेटी बीमार है। सुनीता ने लिखा बेटी ठीक हो जाए। बेटी ठीक हो गई। मोहन आया बोला मुझे नौकरी चाहिए। सुनीता ने लिखा मोहन को मेहनत से एक लाख की नौकरी मिले। और मिल गई। शाम को सुनीता ने सोचा क्या मैं माँ को वापस ला सकती हूँ। उसने लिखा माँ वापस आ जाए। पीछे से आवाज आई बेटा। माँ खड़ी थी। सुनीता रोने लगी। माँ बोली बेटा जो मर गए उन्हें वापस नहीं बुलाते। यह नियम के खिलाफ है। सुनीता ने लिखा माँ खुशी से अपने लोक जाए। माँ चली गई। रात को गायत्री देवी आईं बोली तुमने अच्छा किया। पर कीमत चुकानी होगी। सबसे प्यारी चीज छोड़नी होगी। सुनीता बोली मेरी प्यारी चीज डायरी है। उसने डायरी शिवलिंग पर रख दी। बोली मेरे वरदान बने रहें। रोशनी निकली। आवाज आई अब तुम्हें कलम की जरूरत नहीं। तुम जो सोचोगी सच होगा। सुनीता ने सोचा मंदिर में भीड़ हो। भीड़ आ गई। सोचा भंडारा हो। भंडारा हो गया। लोग कहने लगे मंदिर चमत्कारी है। रात को कागज मिला लिखा था अभी सत्तावन हजार शब्द हुए हैं एक लाख तैंतीस हजार बाकी। सुनीता ने सोचा अगली कड़ी सात हजार शब्द की हो। और सुबह डायरी में सात हजार शब्द लिख गए। सुबह फिर बक्सा मिला। कड़ी 14 - सोने की कलम की कीमत सुनीता सुबह उठी। आंगन में बक्सा था। बक्से पर लिखा था यह तुम्हारे वरदान का बक्सा है। उसने बक्सा खोला। अंदर सोने की कलम थी। और डायरी थी। डायरी पर लिखा था इस कलम से जो लिखोगी सच होगा। सुनीता डर गई। कल रात उसने लिखा था सोने की बारिश हो और बारिश हो गई थी। अब कलम मिल गई तो और भी ताकत आ गई। रानी आई बोली माँ फीस भरनी है। सुनीता ने लिखा रानी की फीस भर जाए। और फीस भर गई। पूजा बोली किताबें चाहिए। सुनीता ने लिखा पूजा को किताबें मिल जाएं। किताबें आ गईं। सीमा बोली डॉक्टर बनना है। सुनीता ने लिखा सीमा डॉक्टर बनेगी। किताब आ गई। सुनीता समझ गई कलम में बहुत शक्ति है। पर अम्मा बोली बेटा सोच समझ कर लिखना। हर वरदान की कीमत होती है। दोपहर को एक गरीब आदमी आया। बोला बेटी बीमार है। सुनीता ने लिखा बेटी ठीक हो जाए। बेटी ठीक हो गई। मोहन आया बोला मुझे नौकरी चाहिए। सुनीता ने लिखा मोहन को मेहनत से एक लाख की नौकरी मिले। और मिल गई। शाम को सुनीता ने सोचा क्या मैं माँ को वापस ला सकती हूँ। उसने लिखा माँ वापस आ जाए। पीछे से आवाज आई बेटा। माँ खड़ी थी। सुनीता रोने लगी। माँ बोली बेटा जो मर गए उन्हें वापस नहीं बुलाते। यह नियम के खिलाफ है। सुनीता ने लिखा माँ खुशी से अपने लोक जाए। माँ चली गई। रात को गायत्री देवी आईं बोली तुमने अच्छा किया। पर कीमत चुकानी होगी। सबसे प्यारी चीज छोड़नी होगी। सुनीता बोली मेरी प्यारी चीज डायरी है। उसने डायरी शिवलिंग पर रख दी। बोली मेरे वरदान बने रहें। रोशनी निकली। आवाज आई अब तुम्हें कलम की जरूरत नहीं। तुम जो सोचोगी सच होगा। सुनीता ने सोचा मंदिर में भीड़ हो। भीड़ आ गई। सोचा भंडारा हो। भंडारा हो गया। लोग कहने लगे मंदिर चमत्कारी है। रात को कागज मिला लिखा था अभी सत्तावन हजार शब्द हुए हैं एक लाख तैंतीस हजार बाकी। सुनीता ने सोचा अगली कड़ी सात हजार शब्द की हो। और सुबह डायरी में सात हजार शब्द लिख गए। सुबह फिर बक्सा मिला। कड़ी 14 - सोने की कलम की कीमत सुनीता सुबह उठी। आंगन में बक्सा था। बक्से पर लिखा था यह तुम्हारे वरदान का बक्सा है। उसने बक्सा खोला। अंदर सोने की कलम थी।

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