
मेरे सपनों में एक किताब आती है,
धीरे-धीरे कुछ राज़ सुनाती है।
हर पन्ने में छुपी होती है कहानी,
कभी हँसी, कभी आँखों में पानी।
शब्दों के फूल महकते हैं उसमें,
जैसे बगिया हो किसी सावन के रस में।
कुछ अधूरी बातें, कुछ पूरे ख्वाब,
सबको समेटे रहती वो किताब।
जब भी मन उदास हो जाती है,
वो चुपके से पास आ जाती है।
अपने अक्षरों से सहलाती है दिल,
और भर देती है उम्मीदों का सिलसिला मिल।
मेरे सपनों की वो सच्ची साथी,
नहीं कोई उससे ज्यादा प्यारी बाती।
हर रात वही मिलने आती है,
मेरे सपनों में एक किताब मुस्कुराती है।