
यूँ तो सीखे हैं हुनर कई इस ज़माने में,
मगर एक हुनर ने मेरी दुनिया बदल दी।
जहाँ हर कोई मसरूफ़ था अपनी सुनाने में,
मैंने ठहरकर दूसरों को सुनने की आदत कर ली।
अंडररेटेड है बहुत, पर कमाल है यह,
कि हर शोर के पीछे छिपी खामोशी पढ़ लेती हूँ।
'शुभांगी' बनकर बिखेरती हूँ लफ़्ज़ों की महक,
और रूह में एक अजीब सा 'आनंद' भर लेती हूँ।
अब रास्तों पर चलती हूँ तो सिर्फ़ चलती नहीं,
हर चेहरे की झुर्री में एक नई कहानी दिखती है।
किसी की बेफ़िक्र हँसी, किसी की गुमसुम आँखें,
ढलकर जज़्बातों में, मेरी डायरी में लिखती हैं।
लोग कहते हैं हुनरमंद वो है जो अच्छा बोलता है,
पर मेरा मानना है कि कमाल का हुनर वो है...
जो बोलने से पहले, पूरी शिद्दत से सुनना जानता है।
शायद किसी दस्तावेज़ में जगह न मिले इस कला को,
पर इसने मुझे एक मुकम्मल इंसान बना दिया।
शब्द तो कोई भी लिख लेता है यहाँ,
इस हुनर ने मुझे एक सच्चा 'कलाकार' बना दिया।
✍️✍️शुभांगी आनंद✍️✍️