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“कमज़ोरी से ताकत तक”

पानी ढोने वाला आदमी

एक छोटे से गांव में, सूखी घाटी के किनारे, देव नाम का एक आदमी रहता था। हर सुबह सूरज निकलने से पहले, वह कई किलोमीटर दूर नदी तक जाता, दो बड़े घड़ों में पानी भरता और उन्हें कंधे पर उठाकर गांव वापस लाता।

उन दो घड़ों में से एक बिल्कुल सही था। वह बिना एक बूंद गिराए सारा पानी ले आता। दूसरा घड़ा थोड़ा टूटा हुआ था। घर पहुंचते-पहुंचते उसका आधा पानी रास्ते में ही गिर जाता।

सही घड़ा अपने आप पर गर्व करता था। वह अक्सर कहता, “मैं अपना काम पूरी तरह करता हूं, लेकिन तुम उसकी मेहनत बर्बाद करते हो।”

टूटा हुआ घड़ा शर्मिंदा रहता था। एक दिन उसने देव से कहा, “मुझे माफ कर दो। मेरी वजह से आपकी मेहनत बेकार जाती है।”

देव मुस्कुराया और बोला, “कल रास्ते पर ध्यान से देखना।”

अगले दिन, जब वे नदी से लौट रहे थे, टूटे घड़े ने पहली बार ध्यान दिया कि जिस तरफ वह था, उस रास्ते पर सुंदर फूल खिले हुए थे। रंग-बिरंगे, ताजगी से भरे हुए। दूसरी तरफ ऐसा कुछ नहीं था।

घर पहुंचने पर देव ने कहा, “मुझे तुम्हारी कमी के बारे में पता था। इसलिए मैंने रास्ते में बीज बो दिए थे। तुम हर दिन अनजाने में उन्हें पानी देते रहे। ये फूल पूरे गांव को खुशी देते हैं।”

टूटा हुआ घड़ा चुप हो गया।

देव ने आगे कहा, “तुम्हारी कमी ही तुम्हारी ताकत बन गई। बस तुम्हें यह दिख नहीं रहा था।”

सीख:

आपकी कमियां आपकी कमजोरी नहीं होतीं। सही दिशा मिले तो वही आपकी सबसे बड़ी ताकत बन जाती हैं।

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