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तुम बस आ जाना....

अगर तुम आओ तो यूं आना जैसे सर्दियों की धूप की तरह आना जो बदन से ज्यादा। रूह को छू जाती है

तो मैं वादा करता हूं ना शिकवा होगा ना सवाल ।

तुम बस आ जाना, बिना दस्तक दिए, हम बैठेंगे उस जगह जहां वक्त रुक जाता है

तुम कहते रहना मैं बस सुनता जाऊंगा।

मैं वक्त नहीं पूछूंगा , तुम्हारे आने का ना कोई हिसाब की कहाँ थे अब तक? मैं ये भी नहीं पूछूंगा कि कब तक साथ हो? थकान समझ लूंगा , तुम्हारे झूठ भी मान लूंगा, अगर कुछ भी नहीं कहा गया तुमसे तो तुम्हारी कहानी मैं खुद गढ़ लूंगा।

हमारे सच ओर दुनिया के झूठ के बीच किसी खाली जगह तुम बस आ जाना।

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