अपनी कलम से,
समय देता उत्तर ज़रूर,
ख़ामोश इशारों से ही यारों......
की कोशिश बना रखे महल, है काँच से उसने यारों,
रखते नफ़रत दिल में वो,पत्थर जैसे लोगों से यारों!
है टूटा नहीं हौसला अभी,आँधियों के ज़ोरों से यारों,
सीखा मुस्कुराना मैनें,गहरे ज़ख़्मों के दौरों से यारों!
गिरकर भी जो संभल जाए, वही आगे बढ़ता यारों,
आंधियों में जो जलाए दीप,वही सच्चा योद्धा यारों!
यूँ मत तौल किसी को,उसके आज के हार से यारों,
कल चमक जो उठे किस्मत, टूटे हुए तारों से यारों!
जो बाँट सके दर्द सबका,होता वही अपना है यारों,
मतलब की भीड़ से दूर,सच्चा रिश्ता भी वही यारों!
पत्थर दिलों से भरा शहर,बन रहना फूलों सा यारों,
इन नफ़रत भरे पलों को हराने, प्रेम ही रास्ता यारों!
ग़र खुद पे जीत पा लिए,जग जीतना आसान यारों,
हर ठोकर कुछ न कुछ है सिखाती,मान लेना यारों!
सपनों को सींच पसीने से, सच कर दिखाना यारों,
न डर ऊँची उड़ानों से, है अपने पंख फैलाना यारों!
उम्मीद का दामन थामे हुए, आगे बढ़ते रहना यारों,
क्योंकि जीत उसी की होती, है जो रुका नहीं यारों!
बस रख भरोसा कर्मों पर, दिल की बात मान यारों,
समय देता उत्तर ज़रूर,ख़ामोश इशारों से ही यारों!
ख़ामोश इशारों से ही यारों.....
ख़ामोश इशारों से ही यारों.....
༺꧁🖋️ डॉ. सूर्य प्रताप राव रेपल्ली 🙏꧂༻
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