💔“जब रिश्ता हार गया…” 💔
जहाँ रिश्ता हार गया… और अदालत जीत गई, वहाँ उन वादों का क्या जो सात फेरों के बीच ईश्वर को साक्षी मानकर किए गए थे…?
वो हाथ पकड़कर कहा गया — “हर हाल में साथ निभाऊँगा…” क्या सिर्फ़ एक रस्म था…? या वक्त के साथ एक झूठा सपना बन गया…?
कभी जो रिश्ता दुआओं से शुरू हुआ था, आज वही कागज़ों की फाइलों में दब गया… कभी जो नाम मांग के सिंदूर में बसता था, आज वही एक केस नंबर बनकर रह गया…
आज फैसले कागज़ों पर होते हैं, दिलों पर नहीं… कानून जीत जाता है, पर भरोसा कहीं चुपचाप मर जाता है…
अदालतों में रिश्तों की उम्र नहीं पूछी जाती, बस सबूत माँगे जाते हैं… पर कौन बताए — मोहब्बत का कोई गवाह नहीं होता, और टूटे हुए दिल अपना दर्द लिख नहीं पाते…
जिसे कभी रूह से अपना माना था, आज वही अजनबी की तरह सामने खड़ा होता है… और इंसान बस इतना सोचता रह जाता है — क्या रिश्ते अब इतने हल्के हो गए हैं, कि उन्हें तोड़ना आसान लगने लगा…?
रात के सन्नाटे में आज भी कुछ लोग अपनी शादी की तस्वीरों को देखकर रोते हैं… क्योंकि तस्वीरें तो मुस्कुराती रहती हैं, पर उनके पीछे छिपा रिश्ता कब का मर चुका होता है… 💔
👉सीख
💔“कोर्ट इंसाफ दे सकती है, पर टूटे हुए रिश्तों की गर्माहट नहीं लौटा सकती… रिश्ते कानून से नहीं, नीयत, सब्र और सच्चे दिल से बचाए जाते हैं…” 🖤😭😥