
जिंदगी जरा पैमाने पर रुक,
बटी हुई जिंदगी का हिसाब
रखना है,किसने की नरमाई
और किसने की रुसवाई..
किस अपने ने कब रुलाया,
किसने ना था करीब पर कितना
हंसाया,किसका कैसा था करम
और किसने की कितनी रहम...
साथ कब किसने निभाया और साथ रहते किसने तरसाया,
खुदा ने की कितनी रहमत
और कितनों ने लगाए जाने कितने तोहमत।
सौ दफे जो ना पाया उतना ही संजोया अपना वह भी गंवाया,
सबर रख कर, दुनिया में जो आया,वह एक दिन जाएगा
यह सबक भी पाया।
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(स्वरचित एवं मौलिक)
-शान्वी "शानू"🌼