
बचा ले री माँ तु बचा ले री
जब मैन छोटा था तब भी बचाया तूने
आज है जरूरत तेरी
बचा ले री माँ
छोटे पन मे जब मुझे चोट लगे
तु ढाल बन आ जाती थी
आज मे अकेला हूं तन्हा हूं
न कोई अपना है न ही कोई सहरा
जहा देखु सब सुन्शान पड़ा है
कोई नही दिखता है मुझे
आज तेरी बहुत याद आ रही है
तेरी कही बात याद आती है
बस तु नही होती
मे तन्हा हूं बचा ले री माँ इस तन्हाई से
बचा ले री इस अकेलेपन् से
मै चिल्ला कर रोना चाहता
पर कहा रोउ
तेरी आँचल की कमी खलती है
मैन इस तन्हाई से छुपना चाहता हूं
पर छुपाने वाली तु नही
मैन भागना चाहता हूं
पर पकड़ने वाली तु नही
बचा ले री माँ ,
तु बचा ले री ,