अनपढ़े जज़्बात
लिखा था मैंने सब कुछ,
हर एहसास, हर सवाल…
पर भेजने से पहले ही
डिलीट कर दिया हर बार।
डर था—
फिर वही खामोशी मिलेगी,
जहाँ मेरी बातें होंगी,
और तुम्हारा कोई जवाब नहीं।
मैं हर रात इंतज़ार करता रहा,
कि तुम्हारा नाम स्क्रीन पर चमकेगा…
पर कुछ नाम सिर्फ दिल में रहते हैं,
ज़िंदगी में नहीं आते।
शायद मैंने ज़्यादा चाहा,
या शायद मैं कम था तुम्हारे लिए…
पर सच्चाई ये नहीं कि तुमने जवाब नहीं दिया,
सच्चाई ये है—मैंने खुद को खो दिया।
अब चैट खामोश है,
पर दिल बहुत कुछ कह चुका है…
उन बातों के लिए
जो कभी तुम तक पहुँची ही नहीं।
👉सीख (Moral):
हर एहसास हर किसी के लिए नहीं होता।
जो तुम्हारी क़दर न करे,
उसे अपने जज़्बात समझाने में
अपना वक़्त और दिल दोनों बर्बाद मत करो।