
एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का लड़का रहता था।
उसके पास न बड़ी जमीन थी, न पैसे, न कोई खास पहचान।
लेकिन उसके पास एक चीज़ थी—“हार न मानने की जिद।”
हर सुबह जब गाँव के लोग अभी सो रहे होते, अर्जुन खेतों की पगडंडी पर दौड़ रहा होता।
लोग हँसते थे—
“अरे, इससे क्या होगा?”
“गरीब का बेटा है, गरीब ही रहेगा।”
अर्जुन बस मुस्कुरा देता।
दिन में वह पिता के साथ खेत में काम करता,
रात में लालटेन की रोशनी में पढ़ाई।
कई बार थक जाता,
कई बार रोता भी,
लेकिन उसने कभी रुकना नहीं सीखा।
एक दिन शहर से परीक्षा का परिणाम आया।
पूरा गाँव चौपाल पर इकट्ठा था।
नाम पुकारा गया—
“अर्जुन कुमार… चयनित!”
कुछ पल के लिए सन्नाटा छा गया।
फिर वही लोग, जो कभी हँसते थे,
सबसे आगे खड़े होकर ताली बजा रहे थे।
अर्जुन ने अपने पिता की ओर देखा—
उनकी आँखों में आँसू थे,
लेकिन इस बार मजबूरी के नहीं… गर्व के थे।
उस दिन अर्जुन ने सिर्फ नौकरी नहीं पाई,
उसने साबित कर दिया—
“हालात छोटे हो सकते हैं,
लेकिन सपने कभी छोटे नहीं होते।”
इसलिए याद रखना—
अगर दुनिया तुम्हें कमज़ोर समझे,
तो जवाब शब्दों से नहीं,
अपनी मेहनत से देना।