
छुअन का अहसास
मैं और तुम जैसे नदी के दो किनारे,
आपस में मिल नहीं पाते कभी भी,
लेकिन उनका आपस में एक रिश्ता के रहता है।
जो पानी बहता है ना
उन दोनों किनारों के बीच
वही उनको जोड़ता है
नदी का जहां उद्गम होता है
वहां बस एक छोटी सी धारा होती है,
जैसे हमारे
प्रेम के शुरुआती दिनों में सिर्फ हम ही थे
कोई दूरी नहीं कोई किनारा भी नहीं था
समय के साथ कई रिश्ते समाहित हुए
और एसा लगा कि
हम दूर हो गए हम अलग हो गए
लेकिन एक प्रेम ही था जिसने हमे मिलाए रखा।
जैसे नदी के दो किनारों के बीच बहता पानी
दोनों किनारों को मिलाए रखता है
तो दोनों किनारे एक दूसरे से दूर होते हुए भी एक दूसरे की छुअन का अहसास भूल नहीं पाते ,और यह छुअन का अहसास प्रेम बनकर हमेशा जिंदा रहता है।