मेरे अंदर की आवाज़
तुम्हारी आँखों में जो चुप्पी है,
वो सिर्फ खामोशी नहीं… एक कहानी है।
हर सवाल के पीछे छुपा है एक संघर्ष,
हर मुस्कान के पीछे अधूरी निशानी है।
तुम वो आग हो जो राख में भी जलती है,
तुम वो नदी हो जो चट्टानों से भी निकलती है।
तुम्हें कमजोर समझने वाले क्या जानें—
तुम्हारी ख़ामोशी भी कितनी बदलती है।
कभी माँ बनकर खुद को भूल जाती हो,
कभी बेटी बनकर सपनों को सुलाती हो,
कभी पत्नी बनकर हर दर्द छुपाती हो,
पर खुद से मिलना… अक्सर टाल जाती हो।
सुनो, अब वक्त है खुद को पुकारने का,
अपने ही अंदर एक दीप जलाने का,
जो टूट गया उसे छोड़ दो यहीं,
अब वक्त है खुद को फिर से बनाने का।
तुम “चरित्र” नहीं, तुम “चरित्र की परिभाषा” हो,
तुम सवाल नहीं, हर जवाब की भाषा हो।
तुम्हें झुकाने की कोशिश बहुत होगी,
पर याद रखना—तुम ही अपनी आशा हो।
डरो मत उन आवाज़ों से जो गिराना चाहती हैं,
उठो, उन नज़रों से जो मिटाना चाहती हैं,
तुम्हारी हर धड़कन एक इंकलाब है—
तुम वो स्त्री हो… जो दुनिया बनाना जानती है। ✨
🌼 Moral (संदेश):
स्त्री की असली ताकत उसकी बाहरी छवि में नहीं, बल्कि उसके अंदर की आवाज़, साहस और आत्मसम्मान में होती है। दुनिया चाहे जितना परखे, एक औरत जब खुद पर विश्वास रखती है—तो कोई उसे हरा नहीं सकता।