🌹 “शादी… वचन भी, और सच भी” 🌹
शादी कोई खेल नहीं,
जो हर मोड़ पर दोहराई जाए…
ये वो वचन है,
जो दिल से निभाई जाए…
एक बार जो किसी को अपना कहा,
वो एहसास कहीं खोता नहीं…
चाहे वो पास हो या दूर,
दिल उसे यूँ ही छोड़ता नहीं…
आजकल लोग कहते हैं—
“ज़िंदगी दोबारा शुरू कर लो…”
पर कुछ दिल मानते ही नहीं,
कहते हैं— “रूह में बसे को कैसे भूल जाऊँ…”
हाँ…
कभी ये नया मौका नहीं लगता,
बस एक समझौता सा लगता है…
जहाँ एक चेहरा सामने होता है,
और दूसरा दिल में बसता है…
हमारे संस्कार सिखाते हैं—
रिश्ता निभाना, साथ चलना…
पर ये भी सच है—
हर दर्द को सहना ज़रूरी नहीं होता…
कुछ रिश्ते छोड़ना ही बेहतर होता है,
जहाँ प्यार नहीं, बस दर्द रह जाता है…
और कुछ लोग दूर होकर भी,
हमेशा दिल में ज़िंदा रह जाते हैं…
सच्चा प्यार शायद वही है—
जो पास होकर भी सच्चा हो,
और दूर होकर भी सम्मान में जिंदा रहे…
👉सीख (Moral):
रिश्ते अनमोल होते हैं, इसलिए उन्हें पूरी ईमानदारी से निभाना चाहिए।
पर अगर रिश्ता दर्द, अपमान या ज़ुल्म बन जाए—
तो उससे निकलना भी उतना ही ज़रूरी है।
क्योंकि सच्चा प्यार सिर्फ निभाने में नहीं,
बल्कि खुद की इज़्ज़त बचाने में भी होता है।