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*हमर छत्तीसगढ़*

जब रंधनी खोली ले

मुनगा बरी महर महर

महमहाथे ।

अऊ सेमी संग म

मेथी भाजी के साग

गोंदरी के फोरन म चुरथे

तब छत्तीसगढ़ कहलाथे ‌।

बिजौरी भूंजाथे

चनाबूट के होरा गुंगवाथे

चइत महीना म

पानी के बरसा होथे

उही ला छत्तीसगढ़ कहिथे ।

अमारी भाजी संग

रमकलिया रांधथे

ऊरीद दार के डुबकी कढ़ी

चना बेसन के चीला कढ़ी

भजीया कढ़ी मेथी डारे

मन ला ललचाथे ।

चेंच भाजी म

रखीया बरी फोर के डारथे

गोंदरी अऊ खड़े मिरचा के

बघारा करथे

तेन छत्तीसगढ़ीया कहाथे ।।

- हितेंद्र कुमार श्रीवास

- कोंडागांया छत्तीसगढ़ीया भारतीय (494226).

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