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सीता वनवास

वैदेही मिथला की राजदुलारी है |
आज कर रही वनवास की तैयारी है ||

छोड़ पति प्रिय अवध की गलिया
काटें बनी जैसे ख्वाब की कलिया
लखन बोले मा सीय तो बेचारी है
वैदेही मिथला की...............................

धिक्कार प्रजा को जो न्याय न दिखाती है
ऐसे रघुवर वधु रानी पर लांछन लगाती है
अग्नि परीक्षा ले मिथ्या दोष को लगा रही है
वैदेही मिथला की....................................

अपनी प्रजा के खातिर भेंट क्या चढ़ागे
अवध बचाने हेतु क्या सिया को ठुकरेंगे
साध्वी सती अर्धांगिनी त्यागी कैसे प्यारी है
वैदेही मिथला की....................................

चढ़ गये लखन रथ चढ़ गयी मा सीता
पहुचेंगे आरण्य विहार जैसे दिन बीता
वन गाये गीत मात सिय जो पधारी है
वैदेही मिथला की...............................

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