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धर्म का दर्पण

  • शीर्षक: “धर्म का दर्पण”

    लेखक: विजय शर्मा ऐरी

    हिन्दू धर्म, वह प्राचीन धारा,

    जिसमें बहता ज्ञान अपार,

    ऋषियों की तपस्या से जन्मा,

    विज्ञान से भी गहरा इसका सार।

    वेदों की वाणी, उपनिषदों की गूँज,

    हर श्लोक में छिपा है प्रकाश,

    योग, आयुर्वेद, ज्योतिष विद्या,

    दुनिया को दिया जिसने विश्वास।

    यह केवल पूजा का मार्ग नहीं,

    जीवन जीने की कला सिखाए,

    प्रकृति, आत्मा और ब्रह्म का संगम,

    हर प्राणी में ईश्वर दिखाए।

    पर आज वही धर्म उपहास बना,

    मंचों पर हंसी का पात्र हुआ,

    फिल्मों, धारावाहिकों के रंग में,

    सच का स्वर कहीं लुप्त हुआ।

    क्योंकि कुछ चेहरे ऐसे भी हैं,

    जो धर्म का नाम बेचते हैं,

    स्वार्थ और लालच के चक्र में,

    सत्य को ही रौंदते रहते हैं।

    तथाकथित संत, बाबा और प्रचारक,

    जब बन जाते हैं व्यापार,

    तो आस्था भी घायल होती है,

    और गिरता है धर्म का आधार।

    यह समय है आत्मचिंतन का,

    सच को फिर पहचानने का,

    धर्म नहीं है दोषी इसमें,

    दोष है उसे बदनाम करने वालों का।

    आओ फिर से दीप जलाएं,

    ज्ञान और सत्य की राह अपनाएं,

    हिन्दू धर्म की असली महिमा को,

    सम्मान के साथ जग में फैलाएं।

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