Personal Story
पछतावा
आज वृद्धाश्रम में अपने बेड पर बैठी सविता जी अपनी गुजरी जिंदगी के बारे में सोच रही थी ....कहने को बेटे बहु पोते पोतियों से भरा पूरा परिवार है पर फिर भी कितनी अकेली है वो ...पर ये अकेलापन भी तो उन्होंने स्वयं चुना है ...या ये कहो कि उनके कर्मों का प...